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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

केचितपातालकुहरे जीवन्मुक्ता व्यवस्थिताः । यथा बलिसुहोत्रान्धप्रह्लादाह्लादपूर्वकाः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्त्ववित्‌ महानुभाव सब भूतों के आत्मस्वरूप, सर्वत्र सत्तावाले, सबके नियन्ता, सबके नायक, व्यवहार-दशा में सर्वाकार ओर परमार्थ दशा मेँ निराकार अपने आत्मा को देखता है