Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यन्नास्ति तदुदेत्याशु देशकालविलासतः ।
शशकाः श्रृङ्गवन्तो हि दृश्यन्ते शम्बरस्थितौ ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठ श्रीरामभद्र को जीवन्मुक्त के लक्षणों की शिक्षा देते हैं।
हे श्रीरामजी, जैसे जल धाराओं का निःशेषरूप से परित्याग कर मेघ परिपूर्णरूप से प्रशान्त हो
जाता है, वैसे ही आप भी समस्त अभिलाषाओं का परित्याग कर अन्तःकरण से मौन हो जाइये यानी
प्रशान्त हो जाइये