Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विचार्य तत्त्वमालोक्य सेव्यन्ते या विभूतयः ।
ता उदर्कोदया जन्तोः शेषा दुःखाय केवलम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
मुक्त होते हुए भगवती गौरी ने भी त्रिनेत्र धूर्जटि को चन्द्रमा की कला की
नाई अति स्वच्छ अत्यन्त धवलवर्ण मोतियों के हार के सदुश अपने गले में लगाया हे