Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 77, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
प्राज्ञः प्रसन्नमधुरः पूर्णः स्वप्रतिभोदये ।
निरस्तखेददौर्गत्यः सर्वस्मिन्स्निग्धबान्धवः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे साधो, इस संसार में आप धन्य हैं, क्योकि विचारप्रवीण बुद्धि
से आप इसी बाल अवस्था में धन्यता के कारण ही इस संसार के विषय में विचार करते हैं