Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 77, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
सुषुप्तवदिदं नित्यं पश्यत्यपगतैषणः ।
असद्रूपमिवासक्तं सर्वत्राखिलमात्मवान् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
रामजी, आत्मा का यथार्थ ज्ञान न होना ही जगत् की स्थिति में कारण है और आत्मा का यथार्थ
ज्ञान ही संसार के विनाश में कारण है, यह आप जानिये