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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

प्राणस्पन्दाच्चितः स्पन्दस्तत्स्पन्दादेव संविदः । चक्रावर्तविधायिन्यो जलस्पन्दादिवोर्मयः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

यौवनवृत्तिवालों में युवा और दुःखितां मे दुःखी-सा रहता है