Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
कदा कीदृक्कया युक्त्या प्राणापाननिबन्धया ।
योगनाम्न्या मनः शान्तिमेत्यनन्तसुखप्रदाम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए उसकी स्थिति सदा ही एक-सी रहती है, ऐसा कहते है।
अपने भीतर सम्पूर्ण वस्तुओं का परित्याग करनेवाला तथा सदा भीतर इच्छाओं से वर्जित तत्त्ववेत्ता
बाहर से यानी ऊपर-ऊपर से उन्मना होकर कार्यों को कर रहा भी एकरूप से ही स्थित रहता है