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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

सम्यगालोकिते रूपे काष्ठपाषाणवाससाम् । मनागपि न भेदोऽस्ति क्वासि संकल्पनोन्मुखः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे आमोद का (सौगन्ध्य का) पुष्प तथा जैसे शुक्लत्व का हिम आश्रय हे, वैसे ही चित्त का यह प्राण, जो चित्त के साथ अभिन्नता को प्राप्त हुआ है, आश्रय है