Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, इस जगत् मे प्राणियों के दो प्रकार के हृदय हे - एक उपादेय ओर दूसरा
हेय । अब आप इनका विभाग सुनिये