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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 46

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, अभ्यास के द्वारा प्राणवायुओं का जब चांचल्य विनष्ट हो जाता है तब मन विश्रान्ति को प्राप्त करता है और निर्वाण (मोक्ष) अवशिष्ट रह जाता है