Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 51
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हिन्दी अर्थ
यहाँ पर वसिष्ठजी इदं दृश्यं यत्र न“ इस वाक्य से आधेयतारूप से, “यतो न“ इससे उपादेयतारूप
“यन्न“ इससे तादात्म्य सम्बन्ध से जगत् में सच्विदानन्दात्म सम्बन्ध का निषेध करने से किसी अंश से
भी जगत् और ब्रह्म का सादृश्य नहीं है, यह सूचित हुआ । अतएव विनाशित्व आदि धर्मो से युक्त जगत्
में कोई भी ब्रह्म का दृष्टान्त नहीं हि, ऐसा कहते है ।
यह जगत् विनाशी, विकल्पस्वरूप तथा अनेकविध गुणों से युक्त है, इसलिए समस्त गुणों से
वर्जित उस आत्मा का इस जगत् में कोई भी सदृश दृष्टान्त दिखाई नहीं पडता