Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 8, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अन्ये ऊचुः ।
द्रष्टृदर्शनदृश्यानि त्यक्त्वा वासनया सह ।
दर्शनप्रथमाभासमात्मानं समुपास्महे ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
औरों ने कहा : द्रष्टा, दर्शन और दृश्य इस त्रिपुटी का वासना के साथ त्यागकर चक्षु, मानस आदि
वृत्तियों के पहले ही उन वृत्तियों की उत्पत्ति में साक्षीरूप से भासमान आत्मा की हम लोग उपासना
करते हैं। द्रष्टा आदि त्रिपुटी के त्याग से दो अवस्थाओं का (जाग्रत-स्वप्न का) त्याग कहा । "वासना के
साथ" इससे तो पूर्वोक्त दोनों अवस्थाओं की बीजभूत वासना से पूर्ण सौषुप्त अज्ञान का भी निरास
कहा । "चाक्षुष मानस आदि वृत्तियों के पूर्व ही उनकी उत्पत्ति में साक्षीरूप से भासमान" इससे पहले से
सिद्ध त्रिपुटी का साक्षी सर्वानुभव सिद्ध हे, यो पृथक् करके दर्शाया है । उसी बीजसहित त्रिपुटी के त्याग
से तुरीय आत्मा की हम लोग उपासना करते हैं, यह अर्थ है