Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तामिमां प्रजहाम्यन्तः संकल्पकलनामिति ।
निर्णीयोमिति शान्तात्मा तिष्ठाम्यात्मनि मौनवत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले यत्न से तो चित्त का उच्छेद कर देना चाहिए, ऐसा कहते हैं।
चित्त ही सभी इन्द्रियो का भीतर से प्रबोध (प्रेरणा) करता हे, इसलिए जैसे मन्दिर से पिशाच का
उच्छेद कर देते हैं, वैसे ही चित्त का उच्छेद कर देना चाहिए