Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 21
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हिन्दी अर्थ
हे
चित्त, तुम तत्त्वरहित जड, भ्रान्त ओर शठ हो, तुम्हारा आकार अत्यन्त असत् है, अज्ञानस्वरूप तुम्हारे
द्वारा अज्ञानी पुरुष को ही बाधा पहुँच सकती है, न कि विचारवान् ज्ञानी पुरुष को