Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
लोभनाट्यारटत्पक्षी तीक्ष्णया द्वन्द्वतुण्डया ।
कायजीर्णद्रुमादस्माद्गुणखण्डं निकृन्तति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर बाह्य ओर आभ्यन्तर स्पर्शो का यानी बाह्य इन्द्रियों के तथा
भीतरी मन के विषयरूपी स्पर्शो का परित्याग कर रहे उस महामुनि ने पापशून्य मन से क्रमशः यह (आगे
कहा जानेवाला) विचार किया