Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
सैवेदानीं विचारेण भृशं क्षयमुपागता ।
एतावदेव ते रूपं साधो यदविचारणम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मूर्ख चित्त, चक्षु आदि इन्द्रिय -गणों का आश्रय लेकर
तुम उपहास के पात्र मत होओ तुम न तो कर्ता हो ओर न भोक्ता हो, किन्तु जड हो | तुम दूसरे साक्षी
के द्वारा बोधित होते हो