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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

भविष्यते च नोदर्कं स्वमनः स्वस्ति तेऽस्त्विति । परिनिर्वामिशान्तोऽस्मि दिष्ट्यास्मि विगतज्वरः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे चित्त, आत्मारूपी परमात्मा ही निरन्तर तुम्हें चिदाभास-व्याप्ति से बोध प्रदान करते हैं, क्योकि सैकड़ों बार आवृत्ति करके भी पण्डित लोगों को मूर्खो को बोध देना ही चाहिए