Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 71
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, तुम उक्त मुख्य
सम्बन्ध में हेतु नहीं हो यानी मुख्य सम्बन्ध के लिए अयोग्य हो, क्योकि तुम स्वतः एक प्रकार के नहीं हो,
तुम्हारे कार्य भी नाना प्रकार के हैं और नाना प्रकार की विहित और निषिद्ध क्रियाओं की ओर झुकी हुई
तुम्हारी सुख-दुःख दशाएँ भी चारों ओर से प्रसिद्ध हैं