Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 76
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हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि मैं संकल्प नहीं करता, किन्तु करतृत्वस्वभाव से आत्मा ही संकल्प करता है, तो
यह शंका युक्त नहीं है, ऐसा कहते है ।
हे चित्त, कल्पनारूपी पंक से वर्जित तथा संकल्पादि मनन के ध्वंसरूप आत्मा में कर्तृता केसी,
क्या कहीं आकाश में पुष्प किसी तरह उत्पन्न हो सकता है ?