Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
इदमप्यङ्ग चिन्मात्रं मनोमात्रभ्रमोपमम् ।
तदपि व्योम चिन्मात्रं मनोमात्रं भ्रमोपमम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसकी अविवेक से उत्पत्ति होती है, उसका विवेक से विनाश हो जाता है।
प्रकाश से अन्धकार विनाश को प्राप्त होता है और प्रकाश का अभाव होने पर अन्धकार हो जाता
है