Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
भावि भूतं भविष्यच्च यथेदं च तथेतरत् ।
जगत्सर्वमिदं दृश्यं संविन्मात्रमनोमयम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए सिद्धान्तभूत युक्तियों से यह निर्णीत हुआ कि तुम
असत् ही हो हे इन्द्रियों के स्वामी चित्त, तुम संसार से पार हो जाओ, तुम्हारा कल्याण हो