Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
अज्ञानान्मन एवेदमित्थं संप्रविजृम्भते ।
प्रत्युल्लासविलासाभ्यां जलमम्बुनिधाविव ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त की असत्ता से ही पुरुषार्था सिद्धि बतलाते हैं।
सौभाग्यवश मैं समस्त चिन्ता-ज्वरों से निर्मुक्त हुआ हूँ, शान्त हुआ हूँ, और चारो ओर से तृप्त हो
गया हूँ, तुरीयपद में स्थित मैं अपनी आत्मा में स्थित हो गया हू ।