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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 40

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, वास्तव में तो वह (मुनि वीतहव्य का) जगत्‌ न तो आपके इस जगत्‌ के सदुश है और न इस जगत्‌ से विलक्षण ही है, क्योंकि वस्तु की समानता और असमानता वस्तु की सिद्धि के बिना नहीं हो सकती, आपके भी जगत्‌ की सत्ता नहीं है, केवल ब्रह्म ही जगत्‌ के रूप में भासता है