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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

भूयोऽपि चिन्तयामास धिया परमबोधया । सर्वसंपीडिताङ्गत्वात्कायो मे प्राणवायुभिः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

आत्मवान्‌ ध्याननिमग्न उस मुनि ने जीवन्मुक्तता के कारण इतने काल को कुछ भी नहीं समझा ओर अपने उस शरीर का त्याग भी नहीं किया