Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
व्रजतां वो विनाशांशमाशा वो विफलीकृताः ।
न समर्थाः समाक्रान्तौ भवन्तो भङ्गुराश्रयाः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रकार विचार कर वायुरूपधारी यानी सूक्ष्म स्वरूप मुनि वीतहव्य ने पूर्व में
व्याख्यात पुर्यष्टक शरीर होकर सूर्य में उस प्रकार प्रवेश किया, जिस प्रकार भस्त्राकाश में (चमड़े की
धौंकनी के अन्तर्गत आकाश में) वायु प्रवेश करे