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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

वनेभ्यो दारु संजातं रज्जवो वेणुचर्मणः । वासी चायःफलान्येव तक्षा ग्रासार्थमुद्यतः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

सूर्य के हृदय में प्रविष्ट हुई मुनि वीतहव्य की संवित्‌ ने क्या किया ? उसे कहते हैं । मुनि वीतहव्य की पुर्यष्टकरूपी वायुमय उक्त संवित्‌ ने पूजनीय भगवान्‌ भास्कर को अन्तःकरण से तुरंत प्रणाम किया