Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
विस्मृतिर्विस्मृता दूरं स्मृतिः स्फुटमनुस्मृता ।
सत्सज्जातमसच्चासत्क्षतं क्षीणं स्थितं स्थितम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने अपने नखों से भूतल को खोद दिया है, ऐसे पिंगल ने भूगर्भ से मुनि वीतहव्य के कलेवर को
उस प्रकार उद्धृत किया, जिस प्रकार सारस पक्षी कीचड से मृणाल (कमलनाल) को उद्धृत करता
है