Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 28
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हिन्दी अर्थ
फिर देह आदि के साथ संगति न हो, इसलिए शीघ्र जगत्रूपी जाल
का भली प्रकार अवलोकन कर वे महामुनि पद्मासन लगाकर बैठ गये ओर तदनन्तर वहाँ अपने आप ही
अपने अन्दर कहने लगे