Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 48

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अब सम्पूर्ण वेहभाग देह को ही समर्पण करते है। हे देह, के अस्थिपंजर ओर दूसरा रक्त तथा आँतरूपी सूत्र बस इन्हीं दो तत्त्वों से समन्वित तुम्हारा असाधारण विभाग हे, इस अपने विभाग को लेकर तुम अपनी प्रकृति की ओर चले जाओ