Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 89, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
हर्षामर्षविकाराणां जीवन्मुक्ता भवादृशाः ।
न केचन वशं यान्ति मृगेन्द्राः शिखिनामिव ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
उपसंहार करते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, महामुनि वीतहव्य की यह सैकड़ों विचारों से समन्वित विश्रान्ति कथा आपसे मैंने
कही, अब आप अपनी प्रज्ञा से इसका विवेचन कीजिए