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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 9, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इति सिद्धगणोद्गीता गीताः श्रुत्वा महीपतिः । विषादमाजगामाशु भीरू रणरवादिव ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : सिद्धगणों से गाई गई इस गीताओं को सुनकर राजा जनक जैसे उरपोक आदमी रण के कोलाहल से दुःखी होता है वैसे ही शीघ्र दुःखी हुए

सर्ग सन्दर्भ

आठवाँ सर्ग समाप्त नवाँ सर्ग यह सुनकर निर्वेद से घर आये हुए राजा का अर्थो के मूल कारण के विचार से मन का निर्णय कथन |