Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 9, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
लोकाजवं जवीभावः सलिलावर्तभङ्गुरः ।
दृष्टोऽद्यापि हि दुःखाय केयमास्था सुखं प्रति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
लोगों के भोग के लिए धनोपार्जन आदि में प्रवृत्तिरूप जो आवेग है, वह जल की भँवरी की
तरह नश्वर तथा जन्म, मरणआदि दु:ख हेतु प्रायः देखा गया है। इसलिए आज भी विषय-सुख के प्रति
मेरी यह आस्था कैसी ?