Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 9, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
निजचेतोविलव्यालाः शरीरस्थलपल्लवाः ।
आधयो व्याधयश्चैते निवार्यन्ते कथं किल ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
देह का अभिमान रहने पर आधिव्याधि के दुर्निवार होने के कारण अज्ञ पुरुष को कहीं भी विश्रान्ति
नहीं मिलती है, इस आशय से कहते हैं।
अपने चित्तरूपी बिल के सर्प जो आधियाँ है एवं शरीररूपी स्थल के पल्वल (छोटे जलाशय) जो
व्याधिर्योँ है, इनका भला कैसे निवारण किया जा सकता है ?