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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 9, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 55

संस्कृत श्लोक

सहस्राङ्कुरशाखात्मफलपल्लवशालिनः । अस्य संसारवृक्षस्य मनो मूलमहाङ्कुरः ॥ ५५ ॥

हिन्दी अर्थ

अव अपनी प्रमाण कुशलता को संसार के मूलनिश्वय से सफल बनाते हैं। सैकड़ों संकल्परूपी अंकुर, देह ओर भुवनरूपी शाखाओं, विराटरूपी अवयवी (मोटी डाल), सुख-दुःखरूपी फलों ओर राग, लोभरूपी पल्लवो से शोभित हो रहे संसार वृक्ष का मूलभूत महांकुर मन हे