Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
विचाराभ्युदयाच्चित्तस्वरूपेऽन्तर्हिते मुने ।
मैत्र्यादयो गुणा जाता इत्युक्तं किं त्वया प्रभो ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, इस ब्रह्माण्ड में तीस हजार
वर्षो तक महामुनि वीतहव्य ने शोकवर्जित होकर सुखपूर्वक विहार किया था, आप भी उसी प्रकार
शोकशून्य होकर सुख पूर्वक विहार कीजिए