Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
न गुणा नागुणास्तत्र न श्रीर्नाश्रीर्न लोलता ।
न चोदयो नास्तमयो न हर्षामर्षसंविदः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
चाहे सर्वज्ञ हो, चाहे बहुज्ञ हो, चाहे भगवान् लक्ष्मीपति हों, चाहे उमापति हों,
कोई भी नियति को अन्यथा करने में समर्थ नहीं हे