Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verses 36–39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verses 36–39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 36
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हिन्दी अर्थ
इस प्रकार क्रिया, कर्म ओर द्रव्यरूपी युक्तियों के स्वभाव से उत्पन्न होनेवाली क्रम प्राप्त सिद्धियाँ
अपनी इच्छा के ही अनुसार सिद्ध हो जाती हैं