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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 44

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, चित्त जिस-जिस पदार्थ में जब-जब गिरता है यानी आसक्त होता है, तब-तब उस-उस पदार्थ मेँ आसक्त होकर वह तत्काल ही तद्रूप हो जाता है