Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 53
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हिन्दी अर्थ
तव पुर्यष्टकं में (सूक्ष्म शरीरो मे) ही वह क्यो उपलब्ध होती है ? इस पर कहते हैँ ।
जैसे जल में सूर्यादि का प्रतिबिम्ब दिखाई पडता है, वैसे ही असमाहित चित्त से संयुक्त पुरुषों को
वह संवित् सत्ता केवल पुर्यष्ट के में ही हजारों विषम परिणामोवाली, परिच्छिन्न तथा तैर रहे पदार्थ की
नाई चपल दिखाई पडती है