Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 55
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इस विषय में मुझसे आप दूसरी भी युक्ति सुनिए | वह यह है कि स्पन्दन ही नाश में
कारण है ओर यह रपन्द चित्त से जनित अथवा वात से जनित एक प्रकार का विकार हे, यह बात
लौकिक व्यवहार में प्रसिद्ध हे