Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
भावाभावदशाकोशं दुःखरत्नसमुद्गकम् ।
बीजमस्य शरीरस्य चित्तमाशावशानुगम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : ब्रह्मन्, किस महात्मा का मन विनष्ट हुआ था ? विनाश को प्राप्त हुए मन का
स्वरूप किस प्रकार का होगा ? चित्त का नाश कैसा है ? और नाश को प्राप्त हुए मन की व्यवहार क्षमता
का लक्षण क्या हे ?