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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

तस्मात्प्राणपरिस्पन्दैर्वासनाचोदनैस्तथा । नो चेत्संविदमुच्छूनां करोषि तदजो भवान् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, परम पवित्र विदेहमुक्तिरूपी निर्मल पद में समस्त श्रेष्ठ गुणों का आश्रय भी प्रातिभासिक मन विलीन हो जाता है