Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
यावद्विलीनं न मनो न तावद्वासनाक्षयः ।
न क्षीणा वासना यावच्चित्तं तावन्न शाम्यति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र तथोक्त सर्वोपरि चित्त से ही यह वर्तमान, भूत और भविष्यत् के शरीर
समूह उत्पन्न हुए हैं। और यह बात सबको स्वप्न के भ्रमों में स्वयं अनुभूत होती है