Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 122
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 122 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 122
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, उक्त सत्तासामान्यकोटि में (शोधित तत्पदार्थ की चरमावधि में) स्थित वह पद
निर्मल ओर विकारवर्जित है, वही आत्मा का पारमार्थिक स्वरूप है, उसका साक्षात्कार करने पर
चित्त बाधित हो जाता हे । इसलिए ज्यों ही आप एकमात्र व्यापक उक्त स्वरूप अवगत कर लेगे, त्यों
ही चिरकालिक अपुनरावृत्ति के लिए संसाररूप भय से निर्मुक्त परम पद स्वरूप ही हो जायेंगे