Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्वथा ते समं यावन्न स्वभ्यस्ता मुहुर्मुहुः ।
तावन्न पदसंप्राप्तिर्भवत्यपि समाशतैः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जब बाह्य पदार्थों के
अनुभव से जिन संस्कारों का उद्बोधन होने के कारण बहत्तर हजार नाड़ी मार्गो के छिद्रों में प्राण अपना
व्यापार छोड़ देता है, तब उससे चित्त अन्दर उत्पन्न नहीं होता