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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

संवेद्ये केवले ध्यानं न संभवति राघव । सर्वत्र संभवादस्याः संवित्तेरेव सर्वदा ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे वाम्मियों में सर्वश्रेष्ठ, संक्षेप से इन चार प्रश्नों का मुझको उत्तर दीजिए, जिससे कि फिर मुझमें ज्ञान की अभिवृद्धि हो और ज्ञानरूप तत्त्वांश की सिद्धि हो