Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verses 92–93
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verses 92–93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 92
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हिन्दी अर्थ
इसीलिए देव, गन्धर्व आदि स्वरूप भी इसके कल्पित वेष ही है, वास्तव नहीं है, ऐसा कहते हैं।
न यह देव है, न सुर है, न राक्षस है, न यक्ष हे, न किन्नर है और न तो मनुष्य ही है, किन्तु आदि
सिद्ध विलासिनी अपनी माया से आत्मा जगत् रूपी नाटक खेलता है जसे मायावी नट