Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
विचारधियमप्रौढां हरन्ति विषयारयः ।
प्रचण्डपवनामृद्वीं कृत्तवृन्तां लतामिव ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार इन की तत्वज्ञान के साथ भी परस्पराश्रयता है, यह कहते हैं ।
जब तक तत्त्वज्ञान नहीं होता, तब तक चित्त की शान्ति कहाँ ? और जब तक चित्त की शान्ति
नहीं होती, तब तक तत्वज्ञान नहीं होता