Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
ज्ञानवान्हृद्यशब्देषु वीणावंशरवादिषु ।
कामिन्याः कान्तगीतेषु संभोगमलिनेषु च ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों के साथ चतुर्थ प्राणायाम का भी अभ्यास करना चाहिए, ऐसा कहते हैं ।
हे रामभद्र, तत्त्वज्ञो का मत हे कि वासनाओं के परित्याग के सदुश प्राणायाम भी उपाय हे ।
इसलिए वासना परित्याग के साथ साथ प्राणनिरोध का भी अभ्यास करना आवश्यक हे