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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

उत्ताण्डवशिखण्डेषु केकाकलरवेषु च । रणिताम्भोदखण्डेषु सारसक्वणितेषु च ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

चिरकाल तक प्राणायाम के अभ्यासं से, योगाभ्यास में कुशल गुरुजी के द्वारा दी गई यानी उपदिष्ट युक्ति से तथा स्वस्तिक आदि आसना के जय और हित, मित एवं पवित्र पदार्थो के भोजन से प्राण- स्पन्दन रुक जाता है